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Last updated 07 Mar 2016 - 05:30pm

 


अंगुल चिन्ह द्वारा पकड़े गए
गत पाँच वर्षों में के. अ. चि. ब्यूरो के विशेषज्ञों की सफलता की कहानियाँ ।
वर्ष 2010 से 2014 तक गत पाँच वर्षों में के. अ. चि. ब्यूरो के विशेषज्ञों द्वारा सुलझाये गए अंगुल चिन्ह मामलों में सफलता की कहानियों की झलक पाठक ले सकते है ।


I इंटरपोल मामले

1. कोलम्बिया (दक्षिण अमेरिका) में मानववध के लिए वांछित अंतर्राष्ट्रीय भगोड़े अपराधी की पहचान : के. अ. चि. ब्यूरो मामला संदर्भ सं॰ 203/2010 एडी (इंटरपोल), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो, एनसीबी भारत से दिनांक 04 अगस्त 2010 को अंतर्राष्ट्रीय भगोड़े अपराधी की पहचान के लिए एक उच्च प्राथमिकता वाला पत्र प्राप्त हुआ था । दो प्रतियों वाले संदेश का ये दस्तावेज इंटरपोल कोलम्बिया (दक्षिण अमेरिका) से जनांककीय विवरण वाली पहचान शीत के साथ-साथ बेरियोस ग्योरिन जोस मोरिसियों (कोलम्बिया नागरिक पहचान सं॰ 79705615, जन्म तिथि (14.02.1976) और माइटा रोड्रिग्ज़ पर्ड अलजेण्ड्रो की दस अंकीय अंगुल चिन्ह पर्ची सहित के. अ. चि. ब्यूरो / रा. अ. रि. ब्यूरो को अग्रेषित किए गए थे / इंटरपोल ने के. अ. चि. ब्यूरो से एकल अंगुल चिन्ह के साथ उन दस अंकीय अंगुल चिन्ह पर्ची की तुलना करने के लिए अनुरोध किया था । इन दोनों दस्तावेजों पर अंगुल चिन्हों का बहुत सावधानी से मैन्युअल तुलना करने के बाद श्री एस. पी. सिंह, निरीक्षक, वर्तमान उपाधीक्षक (एफ़. पी.) ने पता लगाया कि बैरियोस ग्योरिन के एकल अंगुल चिन्ह मेयटा रोड्रिग्ज़ पर्ड एलेजेण्ड्रो के 10 अंकीय अंगुल चिन्ह पर्ची के नमूने पर मौजूद दायी तर्जनी (इंडेक्स) (आरआई) के साथ मिलते जुलते थे, अतएव दोनों अंगुल चिन्ह एक जैसे तथा एक ही व्यक्ति के पाये गए । इसमें की गई तुलना का परिणाम ए डी (इंटरपोल), के. अन्वेषण ब्यूरो एन सी बी, भारत, नई दिल्ली को रिकॉर्ड समय में अग्रेषित किया था । श्री एस. पी. सिंह, उपाधीक्षक, (एफ़ पी), के. अ. चि. ब्यूरो द्वारा अंगुल चिन्ह, अपराध शास्त्र, फोरेंसिक एवं पुलिस विज्ञान इत्यादि पर काफी संख्या में वैज्ञानिक अनुसंधान पेपर प्रकाशित किए है, जो केंद्रीय अंगुल चिन्ह ब्यूरो के वेबपेज पर उपलब्ध है ।

2. अपराधिक पूर्ववृत की खोज : के. अ. चि. ब्यूरो केस संदर्भ संख्या 224/2011 एक व्यक्ति सिंह इकबाल से संबंधित अंगुल चिन्ह पर्ची इंटरपोल, लंदन से केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो, नई दिल्ली को अग्रेषित की गई थी और उपलाभ में तलाश के लिए के. अ. चि. ब्यूरो, रा. अ. रि. ब्यूरो, नई दिल्ली में प्राप्त हुई थी । इस तलाश पर्ची को फ़ैक्टस (FACTS) (के. अ. चि. ब्यूरो ए एफ़ आई एस) में संसाधित किया गया तथा के. अ. चि. ब्यूरो पिन 604744 में संग्रहित रिकॉर्ड पर्ची के लिए एक सुराग के रूप में पाया गया । इस सफल तलाश से अधीन (पकड़े गए) व्यक्ति के आपराधिक पूर्ववृत के बारे में पता चला जो भा. द. स. की धारा 324/34 के तहत दिनांक 20.09.2000 को एसडीजेएम, नाभा की अदालत में एफ़आईआर सं॰ 34 दिनांकित 24.09.1996 के अधीन दर्ज अपराधिक ममलें के अनुपालन में सिद्धदोष था । इंटरपोल तलाश पर्ची को सफलतापूर्वक तलाश करने वाली के. अ. चि. ब्यूरो की टीम में निरीक्षक (एफ़पी) श्री पी. के. मिश्रा, श्री अनिल गायनर और श्रीमती एस. इन्दिरा सुधा शामिल थे ।

II. अन्य सरकारी एजेंसीयों से मामले / अनुरोध


1. एनआईए, गोवाहाटी, असम से पहचान हेतु अनुरोध : के. अ. चि. ब्यूरो अ. चि. डी. केस सं॰ 11/2013

एनआईए को संदेह था कि प्रीपाक (PREPAK) (यूपीपीके) के प्रमुख एन. शांति मतेई एक प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन भारत में और विदेशों में अचल संपत्तियों की खरीद हेतु फर्जी दस्तावेजों तथा झूठी पहचान का प्रयोग करते हुए राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में सक्रिय है । जमीन के समझौते, बिक्री कार्यों इत्यादि पर टी. हेमन्ता शर्मा के अंगुल चिन्हों के नमूनों से यह निष्कर्ष निकाला कि चिन्ह एक जैसे थे जिससे सिद्ध होता है कि एन. शांति मतेई ने अवैध खरीद हेतु Psydonym का प्रयोग किया । श्री पी. एस. गुलाटी, निरीक्षक वर्तमान में उपाधीक्षक के प्रयासो से इस खूंख़्वार आतंकवादी की पहचान के कार्य में एनआईए को सहायता मिली ।


2. बेईमान नियोक्ता का पता लगाने में केंद्रीय अंगुल चिन्ह ब्यूरो के विशेषज्ञों ने क्षेत्रीय भविष्य निधि संगठन (आरपीएफ़ओ) की सहायता की : के. अ. चि. ब्यूरो एफ़. पी. दस्तावेज केस सं॰ 21/2012-

यह कर्मचारी भविष्य निधि एवं एम पी अधिनियम 52 के अधीन शामिल 1200 श्रमिकों को एक निर्माण कंपनी द्वारा भविष्य निधि के लाभ का विस्तार न किये जाने का मामला था । आरपीएफ़ई प्राधिकारी को पता चला कि कंपनी द्वारा मजदूरों के नामों, अदायगी विवरण, अंगूठे के निशानों में नियमों के अनुसार भिन्नता है, अतएव के. अ. चि. ब्यूरो / रा. अ. रि. ब्यूरो से मामले को विस्तार से जाँच करने और इसके बाद अंगुल चिन्हों पर अपना मत भेजने का अनुरोध किया । ब्यूरो में विशेषज्ञों द्वारा काफी संख्या में अंगूठे के निशान वाले दस्तावेजों की जाँच की गई, जिनमें से अधिकतर खराब गुणवत्ता के और उनके द्वारा नियुक्त श्रमिकों के अंगुल चिन्हों में काफी त्रुटियाँ पायी गई थी । श्री राम रंजन शर्मा, निरीक्षक (एफ़पी) के गहन प्रयासो से इस मामले को हल करने से आरपीएफ़ओ प्राधिकारी को धोखेबाज़ नियोक्ता को पकड़ने में सहायता मिली जिन्होंने गलत उद्देश्यों के लिए दस्तावेजों से छेड़छाड़ की ।


3. प्री-मेडिकल परीक्षा में प्रतिरूपण की अंगुल चिन्हों से जाँच की गई : के. अ. चि. ब्यूरो एफ़पी दस्तावेज मामला संख्या 17/2013

एक अंगुल चिन्ह दस्तावेज का मामला माननीय सीजेएम, पौरी गड़वाल से निम्नलिखित दस्तावेजों जी. बी. पंत विज्ञान एवं तकनीकी विश्वविद्यालय, पंत नगर 2011 की प्री मेडिकल परीक्षा शीत ने अनुक्रमांक 313813, 313817 और युसुफ आलम सुपुत्र फारूख अहमद के अंगुल चिन्ह पर्चियों के दो नमूनो के साथ विशेषज्ञों की राय हेतु प्राप्त हुई थी। यह मामला भा. द. स. की धारा 8, 419, 420, 467, 468 एवं 471 के तहत सीआर सं॰ 10/12 की अंतर्गत पुलिस थाना (पीएस) श्री नगर, जनपद पौरी गड़वाल में दर्ज किया गया था । के. अ. चि. ब्यूरो के विशेषज्ञों का कार्य यह पता लगाना था कि क्या प्री मेडिकल परीक्षा 2011 में युसुफ आलम, हरिपाल नामक व्यक्ति के स्थान पर वेश बादल कर आया था । इस मामले कि वैज्ञानिक तरीकों की सहायता से जाँच की गई और यह निष्कर्ष निकला कि परीक्षा केंद्र में हरिपाल के अनुक्रमांक 313815 के सामने लिया गया एलटीआई (बायें अंगूठे का निशान) युसुफ आलम के अंगूठे के निशान से मिलता है । यह उधम सिंह, निरीक्षक (एफ़पी), के. अ. चि. ब्यूरो के प्रयासों से हुआ कि एक छद्मरूपधारी (वेश बदलने वाले व्यक्ति) की पहचान हो गई ।


4. आयुध कारखाना कि भर्ती प्रक्रिया में प्रतिरूपण / धोखेबाजी : दस्तावेज केस सं॰ 22/2013 तथा 03/2014

आयुध कारखाना, रक्षा मंत्रालय, रायपुर, देहारादून, उत्तराखंड प्राधिकार को उनके द्वारा संचालित लिखित तथा ट्रेड परीक्षा के माध्यम से चयनित 54 अभ्यर्थियों की अंतिम सूची की प्रमाणिकता पर संदेह हुआ था । अनंतिम रूप से चयनित सभी 54 अभ्यर्थियों के अंगुल चिन्ह के. अ. चि. ब्यूरो में भेज दिये गए जिसमें तुलना करके प्रतिरूपण के किसी भी प्रकार के मामले के बारे में पता लगाया जा सके । परीक्षण करने के बाद ब्यूरो के विशेषज्ञ ने यह निर्णय लिया कि तीन मामलों में अंगुल चिन्ह भिन्न-भिन्न थे जिससे अभ्यर्थियों द्वारा प्रतिरूपण का पता चलता है । श्री मुकेश कुमार, निरीक्षक (एफ़पी), के. अ. चि. ब्यूरो ने इस मामले की जाँच की थी ।


5. अज्ञात शव की पहचान (यूडीबी) : के. अ. चि. ब्यूरो एफ़एसीटीएस केस संख्या 17/2014

हरिद्वार, उत्तराखंड राज्य पुलिस विभाग से एफ़एसीटीएस (के. अ. चि. ब्यूरो-एएफ़आईएस) में पहचान करने के लिए कुल 55 अंगुल चिन्ह पर्चियाँ प्राप्त हुई थी । उन पर्चियों पर अज्ञात शवों के अंगुल चिन्ह थे । अधिकतर अंगुल चिन्ह धुंधले, अस्पष्ट या आंशिक रूप से स्पष्ट थे । सभी पर्चियों को प्रणाली द्वारा तुलना हेतु स्पष्ट बनाने के लिए कम्प्युटर आधारित अतिरिक्त संवर्धन प्रयास किये जाने की आवश्यकता थी । 55 पर्चियों में से एक अज्ञात शव के अंगुल चिन्ह पर्ची का जामिल सुपुत्र मुस्ताक, पुलिस थाना किथोर, मेरठ, उत्तर प्रदेश से मिलान हो गया था ।
यूडीबी, अंगुल चिन्ह पर्ची (के. अ. चि. ब्यूरो पिन सं॰ 90440105) के सफल इनपुट को पिन 90423149 वाली पर्ची के साथ ट्रेस करने के बाद पकड़े गए व्यक्ति के निम्नलिखित पूर्ववृत का पता चला ओडीआरएस पुलिस थाना में भा. द. स. की धारा 363 दिनांक दिनांक 19.03.2013 की एफ़आईआर सं॰ 60 के तहत दर्ज आपराधिक मामले के अनुपालन में जामिल को दोषी पाया गया । यूडीबी की पहचान की प्रक्रिया में श्रीमती एस. इन्दिरा सुधा, निरीक्षक (एफ़पी), के. अ. चि. ब्यूरो ने सक्रियता से कार्य किया ।


6. आयकर विभाग से परीक्षण हेतु पाँच हजार अंगुल चिन्ह

श्री पी. के. शर्मा, उपयुक्त आयकर, सर्किल-12 (i), नई दिल्ली से मजदूरी और मजदूर (WAGES & LABOUR) के मूल रजिस्टर जिसमें ए-5 (A-5) आकार के 62 पृष्ठ और ए-4 (A-4) आकार के 128 पृष्ठ (कुल 190) 5000 से अधिक अंगुल चिन्ह परीक्षण हेतु एक बहुत बड़ा मामला के. अ. चि. ब्यूरो को प्राप्त हुआ । इस मामले की श्री एस. के. तिवारी, निरीक्षक (एफ़पी) द्वारा जाँच की गई और आयकर विभाग की आवश्यकताओं को पूरा करने के उद्देश्य से रिकॉर्ड समय में मत / निष्कर्ष दिया ।


7. धोखे से धन का आहरण : के. अ. चि. ब्यूरो एफ़. पी. दस्तावेज केस सं॰ 13/2014

श्री सुशांता मांझी (निरक्षर व्यक्ति) जिसका अंबाडोला उप डाकघर में एस. बी. खाता सं॰ 7101564 है, के संबंध में वरिष्ठ अधीक्षक, डाकघर, कोरापुट मण्डल, जेयपोर (के) ओडिशा से दिनांकित 04.09.2014 एक केस दस्तावेज प्राप्त हुआ था । उनके एस. बी. खाते से धोखे से 26.04.2008 को 9000/- रु॰ और दिनांकित 22.02.2011 को 19000/- रु॰ निकले गए थे । आहरण पर्चियों पर संदिग्ध अंगुल चिन्हों को डाकघर द्वारा भेजे गए दस अंकीय नमूना अंगुल चिन्ह पर्ची के साथ तुलना करने के बाद यह पाया गया कि अंगुलियों के निशान श्री सुशांत मांझी (वास्तविक खाता धारक) के नहीं है । इस प्रकार यह स्पष्ट हो गया था कि दो भिन्न भिन्न व्यक्तियों द्वारा दो बाद पैसे निकले गए थे और वास्तविक खा धारक द्वारा नहीं निकले गए । इस मामले की जाँच श्री पवन कुमार मिश्रा, निरीक्षक (एफ़पी) के. अ. चि. ब्यूरो द्वारा की गई थी ।


8. ऋण वसूली अधिकरण मामला : के. अ. चि. ब्यूरो, एफ़. पी. दस्तावेज केस सं॰ 4/2010

एक व्यक्ति ने एसबीआई, जगतपुर, कटक, ओडिशा से कोलेटरल के रूप में संपत्ति गिरवी रख कर 9.00 लाख रु॰ की धनराशि का ऋण लिया । जब वह व्यक्ति उस ऋण को चुकाने में असफल हो गया, तो बैंक ने गिरवी रखी हुई संपत्ति को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू की । उसी समय बैंक को पता चला कि वह संपत्ति वास्तव में सत्तर वर्षीय विधवा की है, जिसे ऋण के लिए आवेदक ने उसकी सहमति या जानकारी के बिना गिरवी रख दिया था । वह वृद्ध महिला उस दोषी व्यक्ति के मित्र की माता थी, और जालसाज़ी का पता लगने पर गिरवी के कागजात पर अंगुली के निशानों की जाँच करने के लिए उस महिला ने ऋण वसूली अधिकरण के समक्ष प्रार्थना की, जो कागजात ऋण लेने के लिए ऋणदाता एजेंसी के समक्ष प्रस्तुत किए गया थे । यह रोचक था कि प्रमाण के रूप में कागजात के प्रत्येक पृष्ठ पर लिए गए कुल 63 अंगुल चिन्ह अत्यंत खराब गुणवत्ता के थे, शायद जान-बूझ कर इस तरीके से रिकॉर्ड किए गए थे । गहन छानबीन के बाद केवल दो अंगुल चिन्ह ही कुछ उपयोग के योग्य पाये गए यद्यपि वे भी आंशिक थे । अब के. अ. चि. ब्यूरो फोटो लैब में निशानों का ध्यानपूर्वक फोटोग्राफ लिया गया । अधिकरण के समक्ष वृद्ध विधवा के अंगुल चिन्ह रिकॉर्ड किए गए थे, इनकी तुलना की गई और गिरवी के कागजात पर लिए अंगुल चिन्हों से भिन्न पाये गए । श्री शिबाजी त्रिपाठी, निरीक्षक (एफ़.पी.) के. अ. चि. ब्यूरो ने मामले की जाँच की और प्रतिरूपण का पता लगाया ।
 

 
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